सुन्दरता की खोज में मत भागो दिन रात
पहले सुंदर स्वयं बनो सुन अंतर की बात ॥
कंचन काया देख कर किया न्योछावर प्राण
सोना नकली या खरा किया नहीं पहचान ॥
चंचल मन एक चोर है हरण करे जो चैन
दिन भर वह दोडायेगा नींद न आए रैन ॥
चार दिन की चाँदनी जिस पर हो कुर्बान
अँधेरा तो आयेगा कर लो कुछ अनुमान ॥
Tuesday, June 17, 2008
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